Friday, October 11, 2024

आज उन्मुक्त हो गया......














आज उन्मुक्त हो गया स्वार्थ बंधनों से 

वो झूठ, दगाबाजी और मक्कारी की कहानी 

जिसका कभी मैं हिस्सा था 

आज उन सभी निषेधात्मक विचारों, 

प्रवृतियों और अपमानो के सर्पदंशो से मुक्ति मिल गयी है |

बहुत लांछन लगाए, कितने असत्य वाक्य कहे 

मेरा  विरोध करने के लिए अपने चरित्र का व्यापार भी  किया 

मगर मैं सत्य के मार्ग में अडिग रहा , 

नहीं नहीं मैं अपनी आत्म अनुशंसा नहीं कर रहा हूँ 

मैं तो मुझ पर किये हुए तुम्हारे अत्याचारों का बखान कर रहा हूँ 

मगर संभवतः तुम्हे इस से कोई फर्क न पड़े 

और अब मुझे भी तुमसे कोई सरोकार नहीं 

मेरे मन में तुम्हारे लिए कोई द्वेष नहीं है, 

मगर अपने लिए पीड़ा है कि मैंने क्यों तुम्हारे दुराचरण का 

समय रहते विरोध नहीं किया , 

क्यों तुम्हारे प्राणघातक 

तुम्हारी आत्ममुग्धता ने 

मेरे अंदर के व्यक्तिव में इतना भय 

उत्पन्न कर लिया था ?

 क्या तुम्हारा उद्देश्य केवल 

मेरे मान और सामान को धत्ता बताना था या फिर 

तुम पहले से ही षड़यंत्र करके आई थी 

खैर अब जो भी हो, 

प्रभु की कृपा से मैं अब तुम्हारे मायाजाल ,

 मोहपाश और घृणित विचारों से स्वतंत्र हो चूका 

तुम्हे सद्बुद्धि मिले न मिले 

मगर मेरे मन को शांति अवश्य मिली है 


- राजेश बलूनी 'प्रतिबिम्ब' 




तुम्हारा हो भी नहीं रहा हूँ मैं

 बड़ी तन्मयता देखा था तुमने मुझे और मैं कुछ सकुचाते हुए सोच रहा था कि  आखिर ये क्या है ! आखिर कौन से पल तुम्हे लगा कि मेरा कन्धा  तुम्हारे सि...